मुंगेली । छत्तीसगढ़ प्रसार । 29 अगस्त 2025 – जिले के सबसे बड़े अस्पताल माने जाने वाले मुंगेली जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की लचर व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। बीते दिनों अस्पताल में इलाज के लिए लाई गई एक गर्भवती महिला को समय पर चिकित्सकीय सहायता नहीं मिल पाई, जिसके कारण परिजनों को मजबूरन उसे निजी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। घटना के बाद स्वास्थ्य तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़िता को लेकर उसके परिजन रात 1 बजे जिला अस्पताल पहुंचे। लेकिन ड्यूटी पर मौजूद नर्स ने बताया कि डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं, सुबह ही आएंगे। इस दौरान महिला दर्द से तड़पती रही और परिजन मदद की गुहार लगाते रहे, लेकिन किसी डॉक्टर की व्यवस्था नहीं हो सकी। अंततः सुबह तक इंतजार करने के बाद परिजनों ने महिला को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसने सुबह 10 बजे सुरक्षित प्रसव किया।
राजनीतिक हलकों में बढ़ी हलचल, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने लिया संज्ञान
मामला सामने आने के बाद प्रदेश में राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज ने घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए मुंगेली जिलाध्यक्ष घनश्याम वर्मा को विस्तृत जांच करने के निर्देश दिए हैं।
जिलाध्यक्ष वर्मा ने पीड़िता से मुलाकात कर पूरे मामले की जानकारी ली। इसके बाद प्रदेश अध्यक्ष के निर्देश पर तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया है, जिसमें नगर पालिका अध्यक्ष रोहित शुक्ला को समिति का अध्यक्ष, और दिलीप बंजारा व अभिलाष सिंह को सदस्य बनाया गया है। टीम को निर्देश दिए गए हैं कि वे मामले की जांच कर शीघ्र रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
जिला अस्पताल: करोड़ों की लागत, लेकिन सेवाओं का अभाव
मुंगेली जिला अस्पताल कभी जिलेवासियों के लिए उम्मीद का केंद्र था। करोड़ों रुपये की लागत से बना यह अस्पताल आज संसाधनों और स्टाफ की कमी के कारण बदहाली की ओर बढ़ता जा रहा है। हर दिन सैकड़ों मरीज यहां पहुंचते हैं, लेकिन डॉक्टरों की कमी और लापरवाह व्यवस्था के चलते अधिकतर मरीजों को निजी अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ता है। ग्रामीण अंचल से आने वाले मरीजों के लिए यह स्थिति और भी विकट है, क्योंकि उनके पास न तो आर्थिक संसाधन होते हैं और न ही विकल्प। रात के समय डॉक्टरों की अनुपलब्धता की शिकायतें आम हो गई हैं।
अस्पताल की स्थिति चिंता का विषय – जिलाध्यक्ष घनश्याम वर्मा
इस पूरे मामले पर जिलाध्यक्ष घनश्याम वर्मा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा –जिले के सबसे बड़े अस्पताल में इस तरह की लापरवाही अत्यंत चिंता का विषय है। यदि एक प्रसूता को इलाज के लिए घंटों इंतजार करना पड़े, तो प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। महिलाओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर प्रदेश सरकार कितनी संजीदा है, यह इससे स्पष्ट होता है। एक बड़े अस्पताल को महज एक डॉक्टर के भरोसे छोड़ देना दुर्भाग्यपूर्ण है।इस मौके पर पीड़िता से मुलाकात के दौरान कांग्रेस जिलाध्यक्ष घनश्याम वर्मा, नगर पालिका अध्यक्ष रोहित शुक्ला, अभिलाष सिंह, कौशल सिंह क्षत्रिय, मुकेश मिरी, श्रवण सोनकर और गौरी सोनकर सहित कई स्थानीय प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
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